तुम चली गई,,,,,

तुम चली गई, यह दिल अकेला रह गया। मेरे सपनों में जब तुम प्रिया बनकर आती हो,सुरमई सारा जग लगता, दिल को बहुत रिझाती हो,जब कांधे पे सर रखकर तुम,एक शब्द प्रेम का कहती हो,हर्षित हो कर तन जगता है,पर निकट नही तुम रहती हो,सुबह होते ही यह स्वप्न, फिर यादों  संग भह गया,तुम चलीपढ़ना जारी रखें “तुम चली गई,,,,,”

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